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सरकारी स्कूल बना उम्मीद की मिसाल: बच्चों को मिल रही शिक्षा, संस्कार और तकनीक एक साथ

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सरकारी स्कूल, लेकिन सुविधाएं किसी प्राइवेट से कम नहीं!

सोलन का राजकीय प्राथमिक पाठशाला शलाह बना मॉडल स्कूल

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सरकारी स्कूल, डिजिटल लैब, खेती और खेल—सब एक साथ!

राजकीय प्राथमिक पाठशाला शलाह: शिक्षा, संस्कार और तकनीक का संगम

JBT अध्यापक प्रदीप शर्मा और अभिनव ने रच दिया बदलाव का इतिहास

राजकीय प्राथमिक पाठशाला शलाह बना सोलन का रोल मॉडल स्कूल

ये कोई प्राइवेट स्कूल नहीं, बल्कि हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले का एक सरकारी स्कूल है—राजकीय प्राथमिक पाठशाला शलाह।
जहां दीवारें बोलती हैं, पौधे सिखाते हैं और कंप्यूटर ज्ञान की रोशनी फैलाते हैं।

इस स्कूल की पहचान अब सिर्फ सरकारी होने तक सीमित नहीं रही। यहां बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, पर्यावरण से जुड़ी गतिविधियां और तकनीकी शिक्षा भी मिल रही है।
दीवारों पर बनी सुंदर पेंटिंग्स, फूलों और सब्जियों की क्यारियां और बच्चों की भागीदारी—यह सब स्कूल को एक मॉडल बना रहे हैं।

इस बदलाव के पीछे दो समर्पित JBT अध्यापक, प्रदीप शर्मा और अभिनव की कड़ी मेहनत है। इन दोनों शिक्षकों ने स्कूल को न केवल एक सकारात्मक माहौल दिया है बल्कि खुद एक उदाहरण भी पेश किया है। प्रदीप शर्मा ने अपने ही बच्चों को इसी स्कूल में दाखिल किया है, जो यह साबित करता है कि वे इस स्कूल की शिक्षा व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखते हैं।

जहां कुछ सरकारी स्कूल बदहाली का शिकार हैं, वहीं शलाह स्कूल दिखा रहा है कि बदलाव मुमकिन है। अगर इसी तरह हर सरकारी स्कूल में शिक्षक अपनी भूमिका को समझें और जिम्मेदारी से काम करें, तो सरकारी स्कूल भी निजी संस्थानों को पीछे छोड़ सकते हैं।

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