हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में चर्चित चेस्टर हिल भूमि विवाद में सरकार ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने एचपी टेनेंसी एंड लैंड रिफॉर्म्स एक्ट की धारा 118 के तहत मामले में नई कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। Himachal Pradesh Government के राजस्व विभाग ने ताजा आदेश जारी करते हुए पहले जताई गई आपत्तियों को वापस ले लिया है और अब उपायुक्त सोलन को नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है। यह आदेश अतिरिक्त सचिव (राजस्व) Anil Chauhan द्वारा 28 मार्च 2026 को जारी आधिकारिक पत्र के माध्यम से दिया गया, जिसे अब प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
सरकारी स्तर पर दोबारा समीक्षा
सरकार ने इस मामले की दोबारा समीक्षा करने के बाद 6 दिसंबर 2025 को जारी उस पत्र को रद्द कर दिया, जिसमें एसडीएम सोलन की जांच रिपोर्ट पर आपत्ति जताई गई थी। अब उपायुक्त को निर्देश दिए गए हैं कि धारा 118 के संभावित उल्लंघन का मामला दर्ज कर सभी पक्षों को सुनवाई का मौका दिया जाए और कानून के अनुसार फैसला लिया जाए।
कानूनी प्रक्रिया फिर तेज
इस फैसले के साथ ही चेस्टर हिल भूमि विवाद में कानूनी प्रक्रिया एक बार फिर सक्रिय हो गई है। लंबे समय से लंबित इस मामले में अब जांच तेज होने की संभावना है, जिसमें भूमि उपयोग और स्वामित्व से जुड़े नियमों के पालन पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
राजनीतिक मुद्दा बना मामला
यह विवाद अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा भी बन चुका है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान भाजपा विधायकों ने इसे जोर-शोर से उठाया, वहीं सीपीआई(एम) ने वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े किए। मुख्यमंत्री Sukhvinder Singh Sukhu और पूर्व मुख्यमंत्री Jai Ram Thakur के बीच भी इस मुद्दे को लेकर तीखी बयानबाजी देखने को मिली। जहां सरकार पारदर्शी जांच का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे राजनीतिकरण बताते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहा है।
आगे क्या?
धारा 118 के तहत नई कार्रवाई शुरू होने से यह साफ है कि सरकार अब इस मामले को निर्णायक मोड़ तक ले जाना चाहती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है, जिस पर प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों की नजर बनी हुई है।










