हमारे हिमाचल में पंचायत चुनाव चुनाव कब होंगे .. आज इस पर बात नहीं करेंगे क्योंकि देर सवेर चुनाव होना तो तय है लेकिन आज बात करेंगे कि आपकी …. जिस बेसब्री से आप सभी पंचायत चुनावों का इंतजार कर रहे हैं क्या आप उन चुनावों के लिए जागरूक हैं या नहीं या फिर आप इस बार भी उस प्रधान को चुनेंगे जो विकास की बात नहीं करेगा … बल्कि आपको शराब बांटेगा .. पैसा बांटेगा या फिर हर गांव में बकरा कटेगा …. और आप बस इसी से खुश हो जाएंगे और अपना वोट बर्बाद कर देंगे …. चुनावों के दौरान कई लाखों का खर्च करने वाला जब वही प्रत्याशी जीतेगा फिर पंचायत के विकास के लिए जो पैसा आएगा वो उन्हीं पैसों से अपना खर्च किया हुआ पैसा रिकवर करेगा …. और आपका वोट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगा….. अक्सर ऐसा ही तो होता है … प्रधान बनने के बाद गांव में विकास कम दिखाई देता है और प्रधान जी का घर और उनका कारोबार खूब चमकता है …..क्यों कुछ गलत कहा क्या … देखिए आपका एक वोट 5 साल के विकास की कहानी लिखता है…आपका एक गलत फैसला पूरे गांव पर भारी पड़ सकता है…सवाल सीधा सा है कि इस बार प्रधान आप चुनेंगे या फिर आपका कीमती वोट भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ेगा…इन तीखे सवालों की आज इसलिए जरूरत है क्योंकि आज बात सरकार की नहीं होगी…सत्ता की कुर्सी की नहीं होगी…आज बात सिर्फ और सिर्फ आपकी सोच की…आपके वोट की और आपके प्रधान की होगी…
हिमाचल में पंचायत चुनाव को लेकर छिड़ी चर्चा पर अब विराम लग गया है…हाईकोर्ट ने 30 अप्रैल से पहले चुनाव कराने के आदेश दिए हैं, हालांकि सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले पर डिजास्टर एक्ट का हवाला देकर सवाल उठाए हैं…और सीएम सुक्खू ने कहा है कि इस पर वो अध्ययन करेंगे…खैर देर-सवेर ही सही पंचायत चुनाव होना तो तय है…लेकिन हमें और आपको जो तय करना है…हम उस पर बात करेंगे….हमारा सवाल सीधा जनता से है कि आप किसे अपने गांव का प्रधान देखना चाहते हैं? और उससे भी बड़ा सवाल ये है कि- क्या आप वाकई सजग हैं या सिर्फ़ आदत से वोट डालते हैं? अक्सर ये देखा गया है कि गांव में प्रधान का कारोबार खूब फलता-फूलता है और गांव का विकास पिछड़ता जाता है…और कुछ जगह तो ये भी देखा गया कि लोग बार-बार एक ही प्रधान को चुनते हैं…हो सकता है उन्होंने गांव में अच्छा काम किया हो…और ये भी हो सकता है कि वो इलेक्शन आते ही नोटों की बारिश कर देते हों…अब भला भोली-भाली जनता को कौन समझाए…कि ये हथकंडे सिर्फ वोट पाने के लिए अपनाए जाते हैं…आपके भले के नहीं…यहां सवाल सीधा जनता से है कि कहीं आप किसी लालच में आकर तो वोट नहीं डाल रहे? या फिर आप किसी दबाव में आकर अपना वोट जाया कर रहे हैं…सोचिएगा जरूर…क्योंकि छोटी सरकार का ये चुनाव में वादे सबसे बड़े होते हैं…ये तो आप और हम अच्छे से जानते हैं…
कोई कहता है कि गांव में सड़कें बनवा दूंगा….तो कोई नौकरी पर लगाने के लोक लुभावने वादे करता है…और कुछ तो ऐसे भी हैं जो धमकी देकर वोट हथियाने में माहिर होते हैं…चुनाव से पहले ही प्रधान बनकर घूमने लगते हैं…लेकिन असली खेल तो वोटिंग से ठीक पहले की रात को शुरू होता है…रात के अंधेरे में नोटों की गड्डियां बंटती हैं…कहीं जाम पिलाकर वोट पक्की की जाती है तो कहीं बकरे कटते हैं… नोट उड़ते हैं और वोट बिकती है…वोटिंग से पहले तक ये अदला-बदली का खेल चलता है और फिर नोटों की गिनती से बात वोटों की गिनती तक पहुंचती है… जिसके बाद सुबह की दोस्ती शाम होते-होते दुश्मनी में बदल जाती है…गांव दो हिस्सों में बंट जाता है…कहीं नारे लगते हैं…कहीं गालियां उड़ती हैं…और कईं बार तो छोटी सरकार का ये चुनाव बड़ी जंग का मैदान बन जाता है…पंचायत चुनाव की ये कड़वी सच्चाई है, जो हर पांच साल में एक बार नहीं, हर बार सामने आती है…और फिर हम कहते हैं…गांव का विकास नहीं हो रहा है…पानी की लाइन नहीं आई है और रास्ते खराब हैं….लेकिन सवाल ये है, जिसे आपने नोट, नशे या दावत पर चुना…उससे आप ईमानदारी और विकास की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? आपको ये समझना होगा कि पंचायत प्रधान कोई राजा नहीं होता…वो आपका सेवक होता है…लेकिन जब सेवक बनने से पहले ही वो करोड़ों के सपने देख ले तो फिर सेवा कहां बचती है?
और हैरानी की बात तो ये है कि सबको सब पता होता है…लेकिन सब चुप रहते हैं…लेकिन याद रखिए…अगर आज आपने आंखें मूंद ली तो अगले 5 साल आप सिर्फ शिकायत ही करते रह जाएंगे…जिस बेसब्री से आप पंचायत चुनाव होने का इंतजार कर रहे हैं…उतनी ही सजगता भी दिखाइए और सोच-समझकर अपने वोट का इस्तेमाल करिएगा…
और हां एक और जरूरी बात…अक्सर लोग कहते हैं कि एक वोट से क्या फर्क पड़ेगा?…लेकिन ऐसा नहीं है…हर गलत प्रतिनिधी की जीत हमारी चुप्पी का नतीजा है और हर अच्छा प्रतिनिधि आपके वोट से ही चुनकर आता है…भले ही चुनाव छोटी सरकार का हो, लेकिन इसका असर आपके हर दिन की ज़िंदगी पर पड़ता है… प्रधान ऐसा चुनिए जो जो गांव में रहता हो, दिखता हो… जो काम करने का रिकॉर्ड रखता हो जो शराब, पैसे या जाति के नाम पर वोट न मांगे जो हर वर्ग महिला, युवा, बुज़ुर्ग सबकी बात सुने इसलिए अपना वोट डालने से पहले सोचिए, समझिए और परखिए…क्योंकि आपका एक वोट गांव के विकास की तकदीर बदल सकता है…
आखिर में हम आपसे यही अपील करते हैं कि वोट बेचिए मत… बचाइए और समझदारी से सही प्रधान को चुनिए……और एक अपील उन सभी लोगों से भी, जो इस बार प्रधान का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। देखिए—अगर आपको वोट जीतनी है, तो विकास के नाम पर जीतिए। अपने काम के नाम पर जीतिए। जनता को बेवकूफ बनाने की कोशिश मत कीजिए, क्योंकि आज की जनता सब जानती है, सब समझती है। आज अगर आप वोट जीतने के लिए वनोट, नशे या दबाव का सहारा लेंगे, तो कल विकास नहीं, वसूली करेंगे। और ये सच्चाई गांव भी जानता है। याद रखिए—जो प्रधान बनने से पहले भ्रष्टाचार का रास्ता चुनता है, वो प्रधान बनने के बाद ईमानदारी की उम्मीद कैसे कर सकता है? जनता ये भी जानती है कि चुनाव से पहले बांटा गया हर नोट, हर दावत और हर लालच बाद में गांव के हक़ से वसूला जाता है। इसलिए अपील साफ है— वादों से नहीं, काम से चुनाव जीतिए। डर से नहीं, भरोसे से जीतिए। क्योंकि पंचायत प्रधान कोई मालिक नहीं होता, वो गांव का सेवक होता है। और अगर सेवक बनने से पहले ही आपने सौदेबाज़ी शुरू कर दी, तो सेवा की उम्मीद वहीं खत्म हो जाती है।










