वो साथ दे रहे थे अपनों का लेकिन वक्त आने पर अपने ही पलट गए और खिलाफ हो गए …. कुछ ऐसा ही हो रहा है मंत्री विक्रमादित्य सिंह के साथ ……विक्रमादित्य सिंह ने डिप्टी सीएम मुकेश अग्रिनहोत्री के उस बयान का समर्थन किया जिसमें मुकेश अग्निहोत्री ने कहा था कि अफसरशाही से रात के अंधेरे में निपटना होगा… लेकिन अब विक्रमादित्य के बयान से अपनी ही पार्टी के मंत्री पल्ला झाड़ रहे हैं ? या यूं कह सकते हैं कि अपनी ही पार्टी में मंत्री विक्रमादित्य सिंह अकेले पड़ गए हैं … जिस बयान से अफसरशाही पर सवाल उठाने की कोशिश थी, वही बयान अब कैबिनेट के भीतर फूट और दूरी की वजह बनता जा रहा है। डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री से भी जब मीडिया बंधुओं द्वारा सवाल किया गया तो उन्होंने ये कहकर टाल मटोल कर दिया कि उन्होंने विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट नहीं पढ़ी है ….. और जब फिर से पत्रकार साथियों ने उनसे ये सवाल किया कि मंडी में आपने भी अफसरशाही पर बयान दिया था तो डिप्टी सीएम मुस्कुराते हुए कहते हैं कि आकाशवाणी तो एक बार होती है हमने जो कहना था कह दिया … विक्रमादित्य सिंह ने एक पोस्ट के माध्यम से और बाद में पत्रकारवार्ता में भी सीधा शब्दों में कहा था कि हिमाचल में तैनात कुछ यूपी- बिहार के IAS-IPS अधिकारी हिमाचलियत नहीं समझते, और राज्य के हितों से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा… विक्रमादित्य सिंह का कहना है कि बाहर से आने वाले अफसरों का हिमाचल में स्वागत है लेकिन अगर अफसर शासक बनने लगेंगे तो वो बर्दाशत नहीं किया जाएगा …. उन्होंने डिप्टी सीएम के मंडी में दिए गए ब्यान का भी समर्थन करते हुए कहा कि उन्होंने भी सोच समझ कर बोला होगा और मैं भी सोच समझकर ही बोल रहा हूं …… देखिए डिप्टी सीएम ने तो मामले को इग्नोर कर दिया …. लेकिन मामले ने तब और तूल पकड़ा जब राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी इस मामले पर साफ कहा— कि बाहर के राज्यों से आए अधिकारी हिमाचल में अच्छा काम कर रहे हैं। जनरल स्टेटमेंट देना ठीक नहीं। इससे ईमानदार अधिकारी हतोत्साहित होते हैं।
यानी… सीधे-सीधे विक्रमादित्य के बयान से असहमति। और अब पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह जो विक्रमादित्य के करीबी भी हैं उन्होंने भी बिना लाग-लपेट बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बता दिया। शिमला में मीडिया से बातचीत में अनिरुद्ध सिंह ने कहा— अधिकारी सरकार के पिलर होते हैं। उन पर सार्वजनिक तौर पर सवाल उठाने से उनका मनोबल गिरता है।
फिर आया सबसे तीखा तंज— अगर कोई मंत्री काम नहीं करवा पा रहा, तो यह उसकी कार्यशैली की कमी भी हो सकती है। यानी…काम नहीं हो रहा, तो दोष अफसरों का नहीं — मंत्री का भी हो सकता है। वहीं , विक्रमादित्य सिंह के अफसरशाही पर दिए गए बयान के बाद हिमाचल की IAS और IPS ऑफिसर एसोसिएशन भड़क उठी है। एसोसिएशन ने मंत्री के बयान को कृत्रिम, अवांछनीय और विभाजनकारी करार दिया। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह के बयान अधिकारियों का मनोबल तोड़ सकते हैं, प्रशासनिक एकता को कमजोर कर सकते हैं और सुशासन पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की कि किसी भी IPS अधिकारी की मंत्री विक्रमादित्य सिंह के साथ ड्यूटी न लगाई जाए। उनका कहना है कि IPS अधिकारी अपनी राज्य या जन्मभूमि से नहीं, बल्कि संविधान और कानून के प्रति निष्ठा के आधार पर पहचाने जाते हैं और हिमाचल में सभी अधिकारी जनता की सेवा में पूरी ईमानदारी और समर्पण के साथ काम कर रहे हैं।
वहीं विपक्ष भी इस पूरे मामले पर सरकार की किरकिरी कर रहा है .,,,, देखिए ये तो साफ है कि विक्रमादित्य इस वक्त अपने ही दिए गए बयान को लेकर घिर चुके हैं …. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आगे क्या होगा। क्या लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह अपने बयान से पीछे हटेंगे या फिर अपने स्टैंड पर डटे रहेंगे, क्योंकि विक्रमादित्य सिंह पहले ही कह चुके हैं कि वह जो भी कहते हैं, सोच-समझकर कहते हैं। ऐसे में अगर यह बयान पूरी जिम्मेदारी के साथ दिया गया है, तो सवाल और भी गंभीर हो जाता है कि आखिर वे कौन से अधिकारी हैं जो ‘हिमाचलियत’ नहीं समझते और जिन पर राज्य के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने आरोप लगाए हैं। क्या विक्रमादित्य सिंह अब इस पूरे मामले दूरी बना लेंगे या फिर उन अफसरों के नाम सामने लाकर पूरे सच से पर्दा उठाएंगे। क्योंकि अगर आरोप सही हैं, तो चुप्पी कई नए सवाल खड़े करती है और अगर आरोप बेबुनियाद हैं, तो सरकार के भीतर ही इस तरह की बयानबाज़ी खुद सरकार के लिए बड़ी सियासी चुनौती बन सकती है। अब देखना यह होगा कि विक्रमादित्य सिंह इस मुद्दे पर पीछे हटते हैं या फिर आख़िरी दम तक अपने बयान पर कायम रहते हैं, क्योंकि हिमाचल की राजनीति में यह विवाद अब छोटा नहीं रहा … खैर अब इंंतजार विक्रमादित्य सिंह की अगली स्टेटमेंट का है … देखना होगा क्या यह विवाद यहां थमेगा… या सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बनेगा।










