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हिमाचल में आपदा लेकिन सियासत में तमाशा ! कांग्रेस की दो टूक- जो सराज में जगत नेगी के साथ हुआ वो जयराम के साथ भी होगा…. जूते- काले झंडे से लेकर तिरंगे-लफगें और इलाज तक पहुंची राजनीति….

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आपदा से अधिक खतरनाक है वो राजनीति,जो इस बुरे वक्त को भी तमाशा बना दे।  
ऐसा हम क्यों कह रहे हैं ये आपको वीडियो के आखिर तक समझ आ जाएगा…. दरअसल हिमाचल प्रदेश इन दिनों दोहरी मार झेल रहा है — एक मार प्राकृतिक आपदा की, दूसरी राजनीतिक आपदा की।जहां आम लोग भूस्खलन, बारिश और टूटी सड़कों से जूझ रहे हैं, वहीं सियासी गलियारों में ‘जूते-काले झंडे’की बरसात हो रही है। कोई किसी को लफंगा बता रहा है तो कोई किसी को अपना इलाज करवाने की नसीहत दे रहा है….


इस पूरे सियासी बवंडर को ज्यादा तूल उस दिन से मिला जब  आपदा के बाद सराज घाटी में हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंचे मंत्री जगत सिंह नेगी का स्वागत भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडों के साथ किया. जंजैहली पहुंचने पर मंत्री जगत सिंह नेगी को यहां खड़े दर्जनों भाजपा कार्यकर्ताओं ने काले झंडे दिखाए और गो बैक के नारे लगाकर यहां से वापिस जाने को कहा. यहां तक की उनकी गाड़ी पर जूते और और काले झंडे भी फेंके गए….हालात इतने खराब हो गए थे कि करीब 40 मिनट तक मंत्री जी गाड़ी के अंदर बैठे रहे — न आगे जा सके, न बाहर निकल सके।
अब सवाल है कि जगत सिंह नेगी का आखिर सराज की जनता ने विरोध किया क्यों – बता दें कि जब सराज में आपदा आई तो उस वक्त नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर लगातार लोगों के बीच जा रहे थे और आपदा प्रभावितों से मुलाकात कर रहे थे …. और इसी बीच कैबिनेट मंत्री जगत सिंह नेगी की तरफ से एक ऐसा बयान आ जाता है जो इस पूरे मामले की जड़ है दरअसल नेगी जी कहते हैं कि जब चुभन अपने जूते में होती है तो पता चलता है कि दर्द आखिर होता क्या है … अब जयराम ठाकुर के क्षेत्र में आपदा आई है तो  वो तो दिल्ली जाएंगे ही मदद मांगने …. बस इस बयान ने तूल पकड़ा और जयराम ठाकुर का भी पलटवार सामने आया … जयराम ठाकुर ने कहा कि मंत्री जगत नेगी की तरफ से दिया गया ये बयान बेहद ही संवेदनहीन…. दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है….
बस फिर क्या था … मामला और गरम हुआ और जब जगत सिंह नेगी सराज के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे तो भाजपा नेताओं को उनका यह दौरा रास नहीं आया. इस दौरान जब लोगों ने मंत्री को हॉर्टिकल्चर कॉलेज का स्थान न बदलने की अर्जी दी, तो मंत्री ने इसपर साफ इनकार कर दिया. जिससे लोग तैश में आ गए और मंत्री के सामने गो बैक के नारे लगाने लगे और काले झंडे दिखाकर विरोध करने लगे……
अब सरकार में बैठे मंत्री के साथ जब ऐसा व्यवहार होगा तो सरकार भी कहां चुप रहेगा…. बस जैसे ही मंत्री जी सराज से बाहर निकले और ये खबर सुर्खियों  में आई उसके बाद भाजपा और कांग्रेस में छिड़ गई जुबानी जंग…. खुद सीएम सुक्खू ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी और कहा की ये सिर्फ मंत्री का नहीं तिरंगे का अपमान है… मंत्री की गाड़ी पर तिरंगा लगा था और उस पर जूते और काले झंडे जिस तरह से फेंके गए हैं वो बेहद निंदनीय है…नेगी के साथ हुए जूताकांड को लेकर सीएम सुक्खू ने भी प्रेसवार्ता की थी और कहा था कि तिरंगे के अपमान में अलग से केस दर्ज किया जाएगा. इससे पहले, मंडी पुलिस ने पूरे घटनाक्रम को लेकर 58 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया था. मंत्री जगत नेगी ने भी इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा की सोची समझी साजिश करार दिया…. हद तो तब हुई जब किन्नौर कांग्रेस ने इस पूरे मामले पर प्रदर्शन किया और जयराम ठाकुर को खूली चेतावनी दे डाली की जगत सिंह नेगी के अपमान का बदला हर हालत में लिया जाएगा…. किन्नौर कांग्रेस ने दो टूक कहा है कि अगर जयराम ठाकुर ने एक कदम भी किन्नौर में रखा तो उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार किया जाएगा…..

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खैर ये सब अभी शांत ही हुआ था कि धर्मशाला से विधायक सुधीर शर्मा ने भी आग में घी डालने का काम कर दिया और अपने सोशल मीडिया पर कांग्रेस द्वारा दिए जा रहे ब्यान की ये तिरंगे का अपमान है …. इस पर चुटकी ले ली और सुधीर शर्मा ने पोस्ट किया कि ये तिरंगे का नहीं लफंगे का अपमान है…… बस फिर क्या ,.,,,, छिड़ गया घमासान….. वहीं सुधीर शर्मा के ब्यान पर मंगलवार को कैबिनेट मीटिंग की ब्रीफिंग में मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि सुधीर शर्मा को इलाज की ज़रूरत है.नेगी ने कहा कि रीजनल हॉस्पिटल सुधीर शर्मा के घर के नज़दीक ही है. ऐसे में उन्हें अस्पताल में इलाज करवाना चाहिए. राजस्व मंत्री ने विधायक सुधीर शर्मा की मानसिकता पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि मुझे नहीं पता सुधीर के दिमाग में क्या चल रहा है.अब फिर से जगत नेगी का वीडियो शेयर करते हुए सुधीर शर्मा ने फिर लिखा है कि हमने तो “लफ़ंगे” का अपमान लिखा था, पर इन्होंने तो मान लिया.  
ये है पूरा मामला – जो इस वक्त भाजपा और कांग्रेस के बीच चला हुआ है 
लेकिन तो सवाल ये है…जब हिमाचल त्रासदी से कराह रहा है,लोग अपने घरों के मलबे से जिंदगी तलाश रहे हैं,क्या नेताओं को जूते, झंडे, और जुमलों से अपना एजेंडा चमकाना चाहिए? क्या वाकई यह वक्त आरोप लगाने का है,या आपदा में डूबे लोगों को राहत देने का?  अगर इस पूरे घटनाक्रम से कोई हारा है, तो वो न कांग्रेस है, न भाजपा — हारा है उस हिमाचल का आम आदमी, जो चुपचाप मलबे के नीचे दबी अपनी उम्मीदों को खोज रहा है….अब तय आपको करना है — आप जूतों-झंडों ..और इलाज की राजनीति में उलझेंगे, या मुआवज़े, मकान और मूलभूत जरूरतों की बात करेंगे?

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