खज़ाना खाली… पर ‘अपनों’ को भरपूर!
नेशनल हेराल्ड को करोड़ों की एड, पेंशनर और कर्मचारी फिर इंतज़ार में!
CM सुक्खू बोले – ‘अपना अखबार है, जितनी मर्जी एड देंगे
हिमाचल पर कर्ज़ का बोझ… लेकिन विज्ञापन देने में कोई रोक नहीं!
सरकार की जेब टाइट… पर अपने अख़बार के लिए दिल लाइट
हिमाचल की आर्थिक हालत चाहे ICU में हो… लेकिन सरकार के इरादे बिल्कुल विज्ञापन वाले मोड में हैं
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का एक बयान इन दिनों सियासी गलियारों में जबरदस्त चर्चा में है।
मुख्यमंत्री ने कहा — “नेशनल हेराल्ड हमारा अखबार है… और हम जितनी मर्जी चाहें, उतनी एड देंगे!”
अब इस बयान के बाद सियासत गर्म है — विपक्ष हमलावर है, और जनता हैरान।
क्योंकि सवाल ये उठ रहा है कि एक तरफ सरकार आर्थिक तंगी से जूझ रही है।
प्रदेश पर 1 लाख करोड़ से अधिक का कर्ज है।
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों की तनख्वाह समय पर नहीं मिल रही।
विकास कार्य ठप पड़े हैं, नई भर्तियां रुकी हुई हैं…
लेकिन दूसरी तरफ एक खास अखबार को खुलकर करोड़ों की एड दी जा रही है — सिर्फ इसलिए क्योंकि वो “अपना” है?
बीजेपी ने इस बयान को मुद्दा बना लिया है।
विपक्ष कह रहा है — “जिस राज्य में कर्मचारियों की सैलरी लटक रही हो, वहां मुख्यमंत्री अपने पसंदीदा अखबार को सरकारी खजाना सौंप रहे हैं!”
और जनता पूछ रही है —
“साहब, अगर एड देना इतना ही जरूरी है, तो पेंशन की भी कोई हेडलाइन छाप दो… शायद कुछ राहत मिल जाए!”
इस पूरे मामले में सरकार की चुप्पी अब और सवाल खड़े कर रही है।
क्योंकि असली मुद्दा ये नहीं कि एड किसे दी गई…
मुद्दा ये है कि जब प्रदेश कर्ज़ में डूबा हो, तब क्या ‘अपनों’ को फायदा पहुंचाना ज़रूरी हो जाता है?
—अब देखना ये है कि क्या आने वाले दिनों में हिमाचल की माली हालत सुधरेगी, या फिर सरकारी विज्ञापनों की गाड़ी ‘अपनों’ के लिए ऐसे ही चलती रहेगी।”
“क्योंकि यहां अखबार को एड मिलती है… और जनता को एडजस्ट करना पड़ता है!”










