सिरमौर के हरिपुरधार चौक में पहुंची नकली पुलिस …. लेकिन असली पुलिस की नजर से बच नहीं पाई …खुद को बता रहे थे पुलिस अधिकारी लेकिन जब सच्चाई बाहर आई तो उसने होश उड़ा दिए …. स्क्रीन पर दिखाई दे रही ये दो गाड़ियां जिन पर पुलिस का बोर्ड लगा हुआ था …. गाड़ियों के नंबर थे — HP07E 0791 और HP28A 8771 दोनों गाड़ियां प्राइवेट थीं, लेकिन आगे लगा था… पुलिस का बोर्ड। हरिपुरधार चौक पर तैनात पुलिस को जब इन गाड़ियों पर शक हुआ, तो उन्हें तुरंत रोका गया। जब पुलिस ने पूछताछ शुरू की, तो गाड़ियों में बैठा एक व्यक्ति खुद को पुलिस अधिकारी बताने लगा। इन असली पुलिस को सवालों के कोई पुख्ता जवाब नहीं मिले। स्थिति को गंभीर देखते हुए हरिपुरधार पुलिस ने तुरंत थाना संगड़ाह को सूचना दी मामला डीएसपी रेणुकाजी तक पहुंचा …निर्देशों के बाद डीएसपी रेणुका प्रियंका चौहान के आदेश पर कोई ठोस सबूत न मिलने की स्थिति में दोनों गाड़ियों को कब्जे में लिया गया।साथ ही गाड़ियों में बैठे सभी लोगों को हिरासत में लेकर थाना संगड़ाह ले जाया गया।अब सबसे बड़ा सवाल — आखिर सच्चाई क्या है .. कौन थे ये लोग … पुलिस बनकर ऐसे कैसे घुम रहे थे …. वर्दी और पुलिस बोर्ड के नाम पर आम जनता को गुमराह करने की कोशिश? या कोई बड़ी साजिश फिलहाल पुलिस मामले की गहन जांच में जुटी है। ये जानने की कोशिश हो रही है कि — गाड़ियों पर पुलिस बोर्ड किसके आदेश से लगाया गया? और ये लोग किस मकसद से इलाके में घूम रहे थे?
लेकिन इस पूरे मामले में
एक बात साफ़ है —
अगर हरिपुरधार पुलिस समय रहते सतर्कता न दिखाती,
तो ये मामला किसी बड़ी घटना में भी बदल सकता था।
हरिपुरधार पुलिस की मुस्तैदी और चौकसी
इस बात का सबूत है
कि ज़मीन पर पुलिस अब भी अलर्ट है।
लेकिन साथ ही
ये घटना एक बड़ा सवाल भी खड़ा करती है —
आखिर पुलिस बोर्ड लगाकर
प्राइवेट गाड़ियों में
कोई भी ऐसे खुलेआम कैसे घूम सकता है?
जनता की सुरक्षा का क्या?
आम लोग असली और नकली में
फर्क कैसे करें?
अब ज़रूरत है
सख़्त जांच और सख़्त कार्रवाई की —
ताकि वर्दी और कानून के नाम पर
दोबारा कोई खेल न हो।
क्योंकि
अगर नकली पुलिस बेखौफ घूमे,
तो भरोसा भी खतरे में पड़ता है
और सुरक्षा भी।
हरिपुरधार पुलिस ने आज ड्यूटी निभाई है…
अब कार्रवाई भी उतनी ही ज़रूरी है।










