बिलासपुर/शाहतलाई। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थल शाहतलाई स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर में आस्था और विश्वास से जुड़ा एक भावुक दृश्य देखने को मिला। हरियाणा के पंचकूला से पहुंचे एक परिवार ने अपने पांच वर्षीय बेटे रियांश के बोलना शुरू करने पर बाबा बालक नाथ के चरणों में चांदी की जीभ अर्पित कर अपनी मन्नत पूरी की।
परिवार के अनुसार, रियांश जन्म से ही बोल नहीं पाता था। बेटे के इलाज के लिए उन्होंने कई अस्पतालों और डॉक्टरों के चक्कर लगाए, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। आखिरकार करीब चार महीने पहले चैत्र मेले के दौरान परिवार शाहतलाई स्थित बाबा बालक नाथ मंदिर पहुंचा और सच्चे मन से प्रार्थना की कि यदि उनका बेटा बोलने लगेगा तो वे बाबा के चरणों में चांदी की जीभ भेंट करेंगे।
परिवार ने बताया कि मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ बच्चे के शीघ्र स्वस्थ होने की विशेष प्रार्थना भी करवाई गई। इसके बाद वे अपने घर लौट गए, लेकिन बाबा बालक नाथ के प्रति उनका विश्वास बना रहा।
परिवार के मुताबिक, करीब दस दिन पहले रियांश ने अचानक बोलना शुरू कर दिया। बेटे की आवाज सुनते ही पूरे परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। परिवार इसे बाबा बालक नाथ की कृपा मानता है। उनका कहना है कि रियांश ने अपनी तोतली आवाज में “जय बाबे दी” भी बोला, जिससे पूरा परिवार भावुक हो गया।
मन्नत पूरी होने के बाद शनिवार को अनिल कुमार सूद अपने परिवार के साथ दोबारा बाबा बालक नाथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और श्रद्धा स्वरूप बाबा के चरणों में चांदी की जीभ अर्पित कर अपनी मन्नत पूरी की।
शाहतलाई में सामने आई यह घटना श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। बड़ी संख्या में भक्त इसे बाबा बालक नाथ की कृपा और आस्था का प्रतीक मान रहे हैं। हालांकि, ऐसे अनुभव व्यक्तिगत आस्था और विश्वास से जुड़े होते हैं।
बताया जाता है कि सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर बाबा बालक नाथ मंदिर में देशभर से हजारों श्रद्धालु माथा टेकने पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं के साथ बाबा के दरबार में हाजिरी लगाते हैं।










