देखिए ये इंसान अपनी जिंदगी के लिए कुदरत से लड़ गया है….
उत्तरकाशी के धराली गांव से आई एक तस्वीर ने पूरे देश की रूह को झकझोर कर रख दिया।एक व्यक्ति, मलबे और सैलाब के बीच, रेंगता हुआ… घिसटता हुआ… मौत से ज़िंदगी की ओर लौटने की कोशिश करता दिखा।उसके चारों ओर तबाही थी…पीछे से बाढ़ का तेज बहाव और सामने ज़िंदगी की आखिरी उम्मीद।कुदरत के कोप का ऐसा मंज़र शायद ही कभी देखने को मिला हो —जहां एक इंसान अपने हाथों से ज़मीन को पकड़ता है, अपने पैरों से मलबे को लांघने की कोशिश करता है… और अपनी हर सांस से मौत को पीछे छोड़ने की लड़ाई लड़ता है। ये सिर्फ तस्वीर नहीं थी… इंसानियत की आखिरी उम्मीद थी
तस्वीर में साफ़ दिखता है —सैलाब और मलबे के बीच एक आदमी घिसटता हुआ, ज़िंदगी की ओर बढ़ता हुआ, वो रेंग रहा है, लड़खड़ा रहा है,पर रुक नहीं रहा…क्योंकि उसे पता है — अगर जिंदगी बचाने का ये मौका उसके हाथ से चला गया तो वह जिंदा नहीं बचेगा. वहीं सामने खड़े लोग चिल्ला रहे थे…कोई बचाओ इसे!”शाबाश भाई! हिम्मत मत हार!” उसका हर कदम मौत से दूर, जीवन की ओर बढ़ रहा था. धराली घाटी — जिसे ‘ईश्वर का तोहफा’ कहा जाता था,जहां सुबहें सेबों के बागानों की खुशबू से शुरू होती थीं,जहां पहाड़ी धुनों में ज़िंदगी बहती थी…वहां अब सिर्फ कीचड़, मलबा और टूटे सपनों की चुप्पी है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बादल फटा, और महज़ 30 सेकेंड में सब कुछ बदल गया।खीरगंगा नदी का शांत बहाव तूफान बन गया और जैसे किसी ने पूरे गांव को मौत के हवाले कर दिया हो। धराली की हर गली, हर पत्थर, हर टूटा दरवाज़ा —आज एक चीख, एक दास्तान, एक दर्द बन चुका है।धराली: अब सिर्फ एक गांव नहीं, एक चेतावनी है. धराली की तस्वीरें सिर्फ खबरों की सुर्खियां नहीं हैं —वो वक्त की वो दस्तक हैं जो कह रही हैं कि कुदरत जब जवाब देती है, तो इंसान का सवाल तक पूछना मुश्किल हो जाता है।
ईश्वर से प्रार्थना है…जो उजड़ गए, उन्हें सहारा दे दो…जो बिछड़ गए, उन्हें शांति दे दो…और जो बचे हैं — उन्हें हिम्मत दे दो…










