उत्तरकाशी का धराली गांव चीख रहा है, यहां के लोग कह रहे हैं हे गंगा मैय्या… ये क्या हो गया… माफ करो…” मौत…पीछे से आ रही थी…और ये लोग… बस अपनी जान बचाने के लिए दौड़ रहे थे…शायद उतनी ही तेजी से, जितनी उनके थके शरीर में ताकत बची थी, जितनी उम्मीद बची थी कि शायद बच जाएंगे..लेकिन अफसोस,मौत की रफ्तार इनसे कहीं तेज़ थी।
बाढ़ की वो सुनामी जब पहाड़ों से नीचे आई, तो वो नदी नहीं, मौत का दरिया बन चुकी थी आज का दिन उत्तराखंड के धराली गांव ने शायद कभी सपने में भी नहीं सोचा था…खीरगंगा नदी में बादल फटा,और जो शांत बहती थी, वही नदी क़हर बनकर गांव पर टूटी। इन तस्वीरों को देखिए…हर फ्रेम में एक चीख है, हर पिक्सल में एक टूटता सपना है, हर पल में कोई किसी को खो चुका है।..लोगों ने जैसे ही चीख-पुकार सुनी —उन्होंने दौड़ लगाई…बूढ़े, बच्चे, महिलाएं… जो जहां था, भागने लगा…लेकिन कुदरत ने उन्हें इतना वक़्त ही नहीं दिया कि वो समझ पाते — क्या हो रहा है। जिस रास्ते से भागे — वहां कुछ मिनट बाद कुछ भी नहीं बचा। न इंसान, न घर, न पेड़… सिर्फ मलबा।स्थानीय लोगों ने जो वीडियो बनाए, वो सिर्फ वीडियो नहीं हैं — वो सवाल हैं…“हे ईश्वर! तू इतना बेरहम क्यों हो गया?”धराली की तस्वीरें सिर्फ एक गांव की नहीं हैं — ये इंसान की लाचारी की सबसे दर्दनाक गवाही हैं। जहां दुकानें खुलती थीं…जहां चाय की दुकानों में जिंदगी की चुस्कियाँ थीं…वहां अब सिर्फ कीचड़, पत्थर और टूटी हुई लकड़ियां हैं।होटल और दुकानें मलबे में समा चुकी हैं। कई दुकानदार खुद अपने ठिकानों के नीचे दबे पड़े हैं। अब तक चार लोगों की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है।लेकिन असली आंकड़ा मलबे के नीचे दबी हुई सच्चाई है… धराली गांव के लिए आप भी प्रार्थना…करिए .. हे ईश्वर… धराली पर अपनी कृपा बरसा दो…जो उजड़ गए, उन्हें सहारा दे दो…जो बिछड़ गए, उन्हें शांति दे दो…और जो बचे हैं — उन्हें हिम्मत दे दो…










