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इतिहास में पहली बार चालदा महासू महाराज का हिमाचल प्रवेश

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हिमाचल प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। उत्तराखंड के जौनसार-बाबर क्षेत्र के आराध्य देवता छत्रधारी चालदा महासू महाराज ने इतिहास में पहली बार टोंस नदी पार कर सिरमौर की पावन भूमि में प्रवेश किया। इस दुर्लभ और पावन क्षण के साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु मौके पर मौजूद रहे।

करीब शाम साढ़े पांच बजे चालदा महासू महाराज टोंस नदी के तट पर पहुंचे और इसके बाद हिमाचल प्रदेश में प्रवेश किया। जैसे ही महाराज ने नदी पार की, पूरा वातावरण ढोल-नगाड़ों, शंखनाद और “महासू महाराज की जय” के जयघोष से गूंज उठा। अनुमान के अनुसार 20 हजार से अधिक श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।

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द्राबिल गांव में देव मेले जैसा माहौल
चालदा महासू महाराज के आगमन को लेकर द्राबिल गांव में देव मेले जैसा दृश्य देखने को मिला। हजारों देव भक्त यहां पहुंच चुके हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों द्वारा बेहतर इंतजाम किए गए हैं। सड़क के दोनों ओर करीब दस किलोमीटर तक वाहन खड़े नजर आए। बच्चे, युवा और बुजुर्ग—हर वर्ग के लोग महाराज के स्वागत में उपस्थित रहे।

इस दौरान बौठा महासू देवता भी अपने भाई चालदा महासू महाराज के स्वागत के लिए द्राबिल पहुंचे। हालांकि समाचार लिखे जाने तक चालदा महासू महाराज द्राबिल नहीं पहुंचे थे। अनुमान था कि महाराज रात्रि करीब दस बजे यहां पहुंच सकते हैं।

14 दिसंबर को पश्मी गांव पहुंचेंगे महाराज
चालदा महासू महाराज 14 दिसंबर को सिरमौर जिले के पश्मी गांव पहुंचेंगे, जहां वे लगभग एक वर्ष तक विराजमान रहेंगे। किस मुहूर्त में महाराज मंदिर में विराजमान होंगे, यह केवल देवता की इच्छा पर निर्भर करता है। पूर्व में भूपऊ में भी महाराज रात्रि एक बजे पहुंचे थे।

जहां एक ओर सिरमौर क्षेत्र में खुशी और उत्सव का माहौल है, वहीं जौनसार-बाबर क्षेत्र में भावुकता देखने को मिल रही है। बीते चार दिनों से अपने आराध्य देवता की विदाई ने लोगों को भावुक कर दिया है। महिलाओं की आंखों से आंसू छलकते नजर आए और हर कोई यही कहता दिखा— “महाराज जल्दी लौट आना।”

गौरतलब है कि 8 दिसंबर को जौनसार-बाबर के दसऊ गांव से निकले चालदा महासू महाराज को न्याय के देवता के रूप में उत्तराखंड के जौनसार-बाबर और हिमाचल प्रदेश के शिमला व सिरमौर क्षेत्रों में पूजा जाता है। महासू देवता चार भाइयों—बासिक महासू, बौठा महासू, पाबासिक महासू और चालदा महासू—के रूप में माने जाते हैं, जिनमें चालदा महासू यात्रा करने वाले स्वरूप हैं।

मान्यता है कि जहां-जहां चालदा महासू महाराज के चरण पड़ते हैं, वहां संकट दूर होते हैं और न्याय की स्थापना होती है। इस ऐतिहासिक अवसर पर उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान और नाहन विधानसभा क्षेत्र के विधायक अजय सोलंकी भी टोंस नदी तट पर मौजूद रहे और उन्होंने महाराज के आगमन पर श्रद्धापूर्वक स्वागत किया।

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