SHIMLA : हाटी समुदाय को अनुसूचित जनजाति यानी एसटी का दर्जा मिले करीब तीन साल होने जा रहे हैं, लेकिन आज भी समुदाय के हजारों लोग इसके वास्तविक लाभों का इंतजार कर रहे हैं।
शिमला में राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की बैठक के दौरान गिरिपार क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्या और उनकी टीम के सामने यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया।
प्रतिनिधियों ने बताया कि हाटी समुदाय का मुद्दा 4 अगस्त 2023 को संसद से पारित होने और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद हाटी समुदाय को एसटी का दर्जा मिला था। इसके बाद हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी इसे लागू कर दिया, लेकिन कुछ समय बाद मामला अदालत पहुंच गया और फिलहाल यह विषय हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
प्रतिनिधियों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर गिरिपार क्षेत्र के विद्यार्थियों और युवाओं पर पड़ रहा है। कई छात्र उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश, छात्रवृत्ति और एसटी वर्ग के तहत मिलने वाली अन्य सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं। वहीं सरकारी नौकरियों में आवेदन करने वाले युवाओं को भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
बैठक के दौरान आयोग के समक्ष यह मांग रखी गई कि हाटी समुदाय से जुड़े मामलों का शीघ्र समाधान हो, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित हो सके और समुदाय को अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत मिलने वाले लाभ समय पर प्राप्त हों।
इसके अलावा कृषि, बागवानी, जनजातीय कल्याण और गिरिपार क्षेत्र के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने कहा कि आयोग की ओर से सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया और हाटी समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से सुना गया।
बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई कि न्यायालय में लंबित मामले पर जल्द निर्णय आएगा और हाटी समुदाय के अधिकारों तथा गिरिपार क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।










