मंडी एक बार फिर डरा हुआ है… सहमा हुआ है… और डूब रहा है कुदरत के उस कहर में, जिसकी कोई गहराई नहीं है…बीती रात से लगातार हो रही भारी बारिश ने मंडी की नींद फिर से उड़ा दी है…सुकेती खड्ड हो या ज्यूणी खड्ड दोनों ही उफान पर हैं … जहां पानी ने रफ्तार ही नहीं, रौद्र रूप भी धारण कर लिया है…मंडी के गुटकर में इस खड्ड का जलस्तर इतना बढ़ गया कि सड़क पर खड़े वाहन देखते ही देखते डूब गए…
कई परिवारों की ज़िंदगी की गाड़ी अब कीचड़ में धंसी पड़ी है… चच्योट के कटवानी नाले में सुबह-सुबह जब सब सो रहे थे, बादल फटा…तीन कमरों का घर ताश के पत्तों की तरह ढह गया…लोग भागे… जान बच गई… लेकिन उनके सपनों का सारा सामान बह गया… मंडी में ब्यास नदी भी अब एक नदी नहीं… एक चेतावनी बन गई है…इसका पानी पंचवक्त्र मंदिर के प्रांगण तक पहुंच चुका है…
जब भगवान ही पानी में डूबे हों… तो इंसान कहां जाए? मंडी में पिछले 24 घंटे में 151 मिमी बारिश दर्ज की गई है…
लैंडस्लाइड से सड़कें बंद हैं… चंडीगढ़-मनाली फोरलेन का हाल बेहाल है…कोल-डैम से छोड़ा गया पानी अब सतलुज को भी उफनाने लगा है…
ब्यास नदी पर बने पंडोह डैम से भी पानी छोड़ा जाएगा…मंडी से लेकर पंजाब तक… हर तरफ बस एक ही हिदायत है – “नदी के पास मत जाना… मौत वहीं घात लगाए बैठी है…”
सुकेती खड्ड की तबाही अकेले मंडी तक सीमित नहीं… बल्ह घाटी की 25 पंचायतों के 30 हज़ार लोग इससे प्रभावित हैं…न सुकून, न चैन… बस हर तरफ बारिश… बर्बादी… और बेचैनी…जब कुदरत अपना रौद्र रूप दिखाती है, तब इंसान सिर्फ मूकदर्शक बन जाता है…मंडी की इन तस्वीरों में सिर्फ पानी नहीं बह रहा… बह रही हैं उम्मीदें, सपने और रोज़ की ज़िंदगी…और सवाल अब भी वही है – कब थमेगा ये कहर…?









