- कांस्टेबल भर्ती परीक्षा में नकल के गंभीर आरोप
- अभ्यर्थियों ने डीसी चंबा को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग
- सोशल मीडिया पर वायरल हुआ भावुक वीडियो
- युवती बोली – “एक समोसे की जांच हो सकती है, तो हमारे भविष्य की क्यों नहीं?”
- 15 जून को हुई थी कांस्टेबल भर्ती की परीक्षा
- अभ्यर्थियों ने कहा – मेहनती छात्र पीछे रह गए
ये सिर्फ आंसू नहीं हैं… ये उस मेहनत का मातम है, जो 15 जून को हिमाचल प्रदेश की पुलिस भर्ती परीक्षा में बेवजह बहा दी गई। प्रदेश भर में युवाओं ने सालों तक तैयारी की, उम्मीदें संजोई… लेकिन अब उन्हीं परीक्षार्थियों की आंखों में सिर्फ मायूसी है। आरोप हैं कि परीक्षा केंद्रों में नकल खुलेआम हुई… चंबा में अभ्यर्थियों ने डीसी को ज्ञापन सौंपते हुए मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में एक युवती रोते हुए कहती है – अगर एक समोसे की जांच हो सकती है, तो हमारे भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ की क्यों नहीं?
उसकी आंखों में आंसू हैं… लेकिन सवाल भी है – कि क्यों नकल करने वालों को खुली छूट मिली? क्यों मेहनत करने वाले बच्चों को पीछे कर दिया गया? शिमला से लेकर चंबा तक युवाओं का गुस्सा साफ झलक रहा है। कई अभ्यर्थियों ने दावा किया है कि परीक्षा के दौरान चेकिंग ढीली थी, टीचर्स ने सख्ती नहीं दिखाई, और नकल करने वालों को रोका नहीं गया। शायद ये वही परीक्षा है जिसे लेकर सरकार ने कहा था – पारदर्शी होगी… निष्पक्ष होगी… लेकिन आज अभ्यर्थियों की चीखती पुकार उस भरोसे को चकनाचूर कर रही है।
अब सवाल सरकार से है – कि क्या इन आंसुओं की भी कोई कीमत है? क्या मेहनत करने वालों को इंसाफ मिलेगा?










