संस्कृत एक विषय ही नहीं बल्कि भारत की प्राचीन भाषा है और वैदिक परंपरा की आधारशिला भी है।
वर्तमान समय में अधिकांश स्कूलों में संस्कृत एक वैकल्पिक या केवल औपचारिक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है।
शिक्षकों की कमी, संसाधनों की अनुपलब्धता और छात्रों में रुचि की कमी प्रमुख कारण होता जा रहा हैं।
आधुनिक समय में अंग्रेज़ी, विज्ञान और तकनीकी विषयों की ओर अधिक ध्यान होने से संस्कृत को गौण बना दिया गया है।

इसी विषय को लेकर जिला सोलन के राजकीय आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय ममलीग में पिछले सत्र में दसवीं की बोर्ड परीक्षा में संस्कृत विषय में उत्कृष्ट, प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्रों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया गया।
इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता प्रिय मोहन शर्मा की ओर से विद्यालय प्रधानाचार्य राजेश चौहान एवं संस्कृत शिक्षक डॉ. यशपाल शर्मा के द्वारा छात्रों को पुरस्कृत किया गया।
विद्यालय की छात्रा आरुषि ने प्रथम, विनीत महेव ने द्वितीय और उमेश ने संस्कृत विषय में तृतीय स्थान प्राप्त किया।
प्रधानाचार्य ने सभी पुरस्कृत छात्रों को बधाई दी तथा संस्कृत मे महत्त्व और महानता को बताते हुए उन्हे संस्कृत विषय के प्रति रुचि लेने का संदेश दिया।










