धराली… उत्तरकाशी का वो इलाका, जहां कुदरत का कहर भले ही थम चुका है… लेकिन यहां जवानों की जंग अब भी जारी है। मलबे में दबे घर… टूटी दीवारें… बिखरा सामान…और इन सबके बीच, सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस और स्थानीय प्रशासन…सभी मिलकर एक ही मिशन में जुटे हैं —घंटों से, दिनों से, एक-एक ईंट पलट रहे हैं। मलबे की एक एक परत में खोज रहे हैं कि शायद लापता लोगों को ढूंढ लिया जाए…. उत्तराखंड पुलिस ने ये वीडियो शेयर किया है.. जिसमें आप देख सकते हैं की जवान डटे हुए हैं बिना थके बिना रुके …. आधुनिक उपकरण साथ हैं, डॉग स्क्वाड साथ है… और आसमान से उड़ते ड्रोन, कठिन रास्तों की पहचान कर रहे हैं। लेकिन असली ताकत इन जवानों का जज़्बा है — जो कहता है, ‘जब तक आखिरी लापता न मिले… तब तक कदम नहीं रुकेंगे।
यहां हर पल एक चुनौती है… मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालना सिर्फ काम नहीं… ये उन परिवारों तक उम्मीद पहुंचाना है, जिनकी आंखें अब भी रास्ता देख रही हैं। धराली में आज, इन वीर जवानों के हौसले मलबे के पहाड़ से भी ऊंचे हैं…अब तक 629 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है…लेकिन सर्च ऑपरेशन जारी है, क्योंकि अभी भी कुछ लोग लापता हैं। ध्वस्त इमारतों में, पत्थरों और धूल के बीच, जवान अपने हाथों से रास्ता बना रहे हैं…आधुनिक उपकरण और डॉग स्क्वाड की मदद से वो हर उस जगह को खंगाल रहे हैं, जहां एक हल्की सी सांस, या किसी के ज़िंदा होने का छोटा सा इशारा हो सकता है….ऊपर आसमान में ड्रोन उड़ रहे हैं…नीचे ज़मीन पर उम्मीद दौड़ रही है…कठिन इलाकों को चिन्हित कर, बचाव टीम तेजी से वहां पहुंच रही है।
धराली की ठंडी हवाओं में…इन वीर जवानों की गरम सांसें सिर्फ एक ही दुआ मांग रही हैं —कि मलबे से कोई ज़िंदा निकल आए…और किसी घर में फिर से चूल्हा जल सके।ये सिर्फ बचाव अभियान नहीं…ये जिंदगी और मौत के बीच उम्मीद की आखिरी लड़ाई है…धराली में आज बस यही दुआ है —कि मलबे के नीचे दबे लोग,फिर से रोशनी देख पाएं…और ये वीर जवान, किसी को ज़िंदा लौटाकर…इस खामोशी को तोड़ पाएं।”










